महंगी होने की वजह से जो पुरूष वियाग्रा का इस्तेमाल नही कर पाते उनके लिए अच्छी खबर है। इस महीने से ब्रिटेन में वियाग्रा का पेटेंट खत्म होने जा रहा है। यानी अब दूसरी दवा कंपनियों को भी वियाग्रा के तर्ज पर जेनेरिक दवा बनाने का अधिकार मिल जाएगा जिससे इसकी कीमतों में काफी गिरावट आने की संभावना है। मौजूदा समय में इसकी कीमत करीब 800 रूपये है जो गिरकर 85 पैसे आ सकती है।
'फाइजर' कंपनी ने 1999 में ब्रिटेन में वियाग्रा लांच किया था। तब से लेकर अब तक इस पर पेटेंट लागू कर रहा है इसलिए कोई भी कंपनी इसके रासायनिक नाम का इस्तेमाल कर यह दावा नही बना सकी है। यही कारण है कि वियाग्रा की कीमत काफी ज्यादा रही है। ब्रिटेन में हर साल डॉक्टर वियाग्रा के लिए बीस लाख पर्चे लिखते हैं। अकेले 2012 में नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने यह दवा बेचकर करीब चार करोड़ पौंड का व्यवसाय किया था।
पेटेंट खत्म होने के बाद जहां आम आदमी और अन्य कंपनियों की राह आसान होगी, वही 'फाइजर' की मुश्किलें बढ़ सकती है। कंपनी को डर है कि कही दूसरी कंपनियों द्वारा बनाई गई दवा वियाग्रा का पीछे न छोड़ दें। इसलिए कंपनी ने फैसला किया है कि वह अपने ब्रांड के तले -सिलडेनाफिल फाइजर' नाम से इस दवा का सस्ता संस्करण लांच करेगी। हालांकि फाइजर के ब्रिटिश ब्रांच के प्रबंध निदेशक जोनाथन एम्स का कहना है कि पहले के मुकाबले वियाग्रा की बिक्री में ज्यादा फर्क नही आएगा क्योंकि अधिकांश पुरूष इस नाम से ही दवा को पहचानते और खरीदते है।
पेटेंट खत्म होने के बाद दूसरी कंपनियों बिना डॉक्टरी पर्चे के सस्ते दामों पर वियाग्रा की जेनेरिक दवा ऑनलाइन उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं जिसपर फाइजर ने आपति जताई है। कंपनी का कहना है कि कई कंपनिया वियाग्रा के नाम पर नकली दवा का कारोबार कर सकती हैं जिससे लोगों को नुकसान होगा। 2011 में फाइजर ने 22 इंटरनेट केमिस्ट से प्राइज़ वियाग्रा का परीक्षण किया था जिसमें 77 फीसदी दवाएं नकली थी। कंपनी के मुताबिक पेटेंट खत्म होने के बाद यही स्थिति आ सकती है।
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